Holi Essay in Hindi – होली पर हिंदी निबंध

Holi Essay in Hindi – होली पर हिंदी निबंध : नमस्कार दोस्तों , अभी कुछ ही दिनों में होली आने वाली है और ऐसे में बच्चो को स्कूलों में होम वर्क और प्रॉजेक्ट्स मिलते है जैसे होली पर हिंदी निबंध , Eassy on Holi in Hindi आजकल बच्चे और उनके माता – पिता इंटरनेट से भी सहायता लेते है। तो ऐसे हम आपके लिए लाये है होली पूरी जानकारी।

Eassy on Holi in Hindi –

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भूमिका – होली फागुन मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है। यह त्यौहार लोगो के अंदर एक नया जोश भर देता है। सनातन धर्म में इसका मान्यताएं अनुपम है। यह पर्व भाईचारे , प्रेम-मिलन , एकता , समानता , मन – मुटाव को भूलकर गले मिलने का महापर्व है। यह त्यौहार आपसी दुरी को मिटा कर प्रेम का संचार करता है।

होली का महत्व अथवा होली क्यों मनाई जाती है – होली के मूल में हिरणकश्यप के पुत्र प्रह्लाद और होलिका का प्रसंग आता है। हिरणकश्यप के पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु के परम् भक्त थे और यह बात राजा हिरणकश्यप को नापसंद थी। वे खुद को भगवान मानते थे और चाहते थे सभी लोग उनकी पूजा करे लेकिन उनके पुत्र प्रह्लाद इस बात से सहमत नहीं थे। इसी कारण हिरणकश्यप ने बालक प्रह्लाद को मारने के लिए अपनी बहन होलिका को नियुक्त किया। होलिका के पास एक ऐसी चादर थी जिसमे अग्नि का कोई प्रभाव नहीं पड़ता था। होलिका प्रह्लाद को लेकर गोद में बैठ गयी ,और फिर हुआ एक दैवीय चमत्कार। होलिका अग्नि में जल कर भस्म हो गयी और विष्णु भक्त प्रह्लाद का बाल भी बांका नहीं हुआ। उसी दिन से सत्य ने असत्य पर विजय घोषित कर दी। तभी से ले कर आज तक होलिका दहन की स्मृति मे होली का पर्व धूम – धाम से मनाया जाता है।

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होली का दूसरा प्रसंग : पौराणिक मान्यताओं के अनुसार त्रेता युग में विष्णु जी के 8 वे अवतार भगवान कृष्ण और राधारानी जी ने रंगोत्सव में प्रेम का रंग चढ़ाया। भगवान श्री कृष्ण जी ने होली के दिन ही राधारानी जी के गाँव बरसाने जाकर राधा और गोपियों के साथ होली खेली थी और तभी से यह त्यौहार आनंदमय और प्रेम का त्यौहार बन गया। ऐसा भी कहा जाता है भगवान श्री कृष्ण जी ने आज ही के दिन पूतना नामक राक्षसी का वध किया था। इसी खुशी में गोपियों और ग्वालो ने रासलीला की और रंगो से खेला ऐसी मान्यता है तभी से होली का त्यौहार मनाया जाने लगा।

होली मनाने की विधि – होली का पर्व दो प्रकार से मनाया जाता है। पहले होलिका दहन मनाया जाता है रात्रि में , जिसके लकड़ियाँ , झाड़ – झखांड आदि को इक्कठा कर के उसे सुबह मुहूर्त में अग्नि में दहन किया जाता है। ग्रंथो के अनुसार होलिका दहन में गाय के गोबर से बने उपले , कुछ चुने हुए पेड़ो की लकड़िया ही जलानी चाहिए। धार्मिक दृष्टि से यह अत्यंत शुभ होता है। होलिका दहन में लोग समूह में एकत्रित होकर गीत गाते है। होलिका दहन में आहुति डालने की परम्परा है अग्नि में आहुति डालने से व्यक्ति के दोष समाप्त होते है तथा वातावरण शुद्ध होता है।

होली वाले दिन लोग प्रातः काल से लेकर दोपहर तक अपने हाथों में लाल , हरे , पीले , गुलाबी रंगो का गुलाल लिए एक दूसरे को रंग लगते है और गले मिलते है। बच्चे – बड़े सभी होली के रंग में रंग जाते है। बच्चे पिचकारियों से रंग – वर्षा करते नज़र आते है गुब्बारों में रंगीन पानी भर कर खेलना बच्चो का प्रिय खेल होता जा रहा है। होली के दिन लोग तरह – तरह वेश भूषा बनाकर घूमते नज़र आते है। शाम होते – होते लोग सनान आदि कर के नए वस्त्र धारण करते है। होली के दिन स्वादिष्ट पकवान व मिठाईया बनती है गुईजा , दहीबड़ा , पूरियां , कटहल खाने और ठंडाई – भांग पीने की परम्परा बरसो से चली आ रही है। होली के दिन गली – मोहल्लो से ढोल मंजीरे बजते सुनाई देते है।

होली का त्यौहार ‘ सत्य पर असत्य विजय ‘ और ‘ दुराचार पर सदाचार की विजय ‘ का सन्देश देता है। आप सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाये।

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