भगवान राम से सीखने चाहिए यह गुण – How to Develop Personality in Hindi

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How to Develop Personality in Hindi
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How to Develop Personality in Hindi- भगवान राम से सीखने चाहिए यह गुण : श्री राम जी सनातन (हिन्दू) धर्म के पूज्य भगवान है। हम ऐसे देश में रहते है जहाँ हम सभी ने बचपन से ही श्री राम जी के बारे के कई किस्से – कहानिया सुने है, सन् 1987 में दूरदर्शन में रामायण सीरीज का प्रसारण किया गया था जिसे लोगो ने बहुत ही ज्यादा पसंद किया था। भगवान श्री राम जी हमारे पूजनीय है, हम उनकी पूजा तो करते ही है लेकिन हमे इसके साथ – साथ राम जी के गुणों को अपनाना चाहिए जिससे हमारा जीवन सर्वश्रेष्ठ बने।

आज हम जानेंगे श्री राम के गुणों के बारे में, जिसे हम अपने जीवन में उतार कर अपने अंदर की बुराइयों को ख़त्म कर अपनी Personality को Develop कर सकते है।

व्यक्तिगत विकास के टिप्स जानिए श्री राम जी से –

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आज्ञाकारी

रानी कैकयी ने राजा दशरथ की दो बार जान बचाई थी , इसलिए रानी कैकयी को राजा दशरथ ने दो वरदान दिए थे की वे अपना वर कभी भी मांग सकती है। रानी कैकयी चाहती थी कि उनका पुत्र भरत राज्य का राजा बने और इसलिए उन्होंने राजा दशरथ द्वारा राम जी को 14 वर्ष का वनवास दिलवाया। राजा दशरथ वचनो में बंधे होने के कारण यह वचन स्वीकार करने पड़े।

राम जी ने एक आदर्श पुत्र की भांति अपने पिता की बात को खुशी से स्वीकारा , उनकी आज्ञा का पालन किया और पत्नी सीता एवं भाई लक्ष्मण के साथ चौदह वर्षो के लिए वनवास चले गए।

धैर्य

हमे भगवान से धैर्य का गुण सीखना चाहिए , जब राम जी को पता चला उनकी पत्नी सीता का हरण हो चूका है , और उस वक़्त उन्हें यह भी नहीं पता था की सीता जी को कौन और कहाँ ले के गया है। लेकिन ऐसी स्थिति में भी राम जी ने अपना धैर्य नहीं खोया। उन्होने शांत दिमाग से खोज शरू की और सब कुछ पता लगाया और आख़िरकार उन्होंने सीता जी को खोज निकला।

इसी तरह हमे भी अपने जीवन में धैर्य का गुण लाना चाहिए। जब भी हमारे जीवन में परेशानी आये हमे धैर्य से काम लेना चाहिए। क्योकि चिंता , गुस्से और घबराहट से बनते हुए काम भी बिगड़ जाते है।

कर्म

श्री राम जी भगवान विष्णु के अवतार थे उन्होंने त्रेता युग में राम जी का अवतार लिया था, राम चाहते तो चुटकियो में सब कुछ कर सकते थे। लेकिन उन्होंने अपना कर्म निभाया , अपने पिता की आज्ञा का पालन किया, 14 वर्षो के लिए वनवास गए , सीता जी कहाँ पर है पता लगाया और रावण से युद्ध भी किया।

हमे राम जी से यह बिलकुल सीखना चाहिए कर्म के बिना हम कुछ नहीं कर सकते। हम अपना कर्म करेंगे तभी हमे उसका फल प्राप्त होगा ना की शॉर्टकट तरीके अपनाने से।

शांत चित्त

श्री राम जी के जीवन काल में अनेको परेशानिया आयी लेकिन उन्होंने अपना चित्त (मन) शांत रखा। कहाँ राम जी महलों में रहने वाले थे अयोध्या के राजा बनने वाले थे , लेकिन सुबह उन्हें 14 वर्षो का वनवास मिला। वन में उन्हें खाने को कंद – फूल ही मिलते ना कोई सुख सुविधा होती। और वहाँ सीता जी का हरण भी हुआ ऐसी कठोर स्थिति में भी श्री राम जी ने अपने मन को शांत रखा, इसीलिए कहा जाता है शांत चित्त से ही संकल्प और विकल्प बनते है। हमे राम जी के इस गुण शांत चित्त को जरूर अपनाना चाहिए।

*** Personality Development tips in Hindi ***

विपत्ति में संयम रखना (know how to develop your personality in hindi )

जब भी हमारे जीवन में परेशानी आती है हम चीखने – चिल्लाने लगते है , हम Solution ढूंढ़ने की जगह चिंता और शोक में डूब जाते है। बल्कि उस वक़्त तो हमे धैर्य से काम लेना चाहिए , अपने मन को शांत कर हमे सोचना चाहिए और कर्म करना चाहिए की परेशानी कैसे दूर हो। कैसी भी विपत्ति या परिस्थिति हो हमे संयम बनाए रखना चाहिए।

आदर्श

राम जी आदर्श पुत्र , पति , भाई , शिष्य, सेवक, मित्र तो थे ही लेकिन उनमे आदर्श शत्रु का भी गुण था। एक ऐसा प्रसंग आता है जिसमे बताया गया है – जब रावण का वध हुआ वह विरगति को प्राप्त हो गए। तो भगवान राम ने , रावण के भाई विभीषण से कहा – ” हे विभीषण जाओ , पंडित वीर रावण की अग्नि संस्कार विधि सम्पन्न करो “.

इस पर विभीषण कहते है – ” मैं ऐसे दुराचार , पापी का अग्नि संस्कार नहीं करूँगा।

श्री राम जी कहते है – ” विभीषण , व्यक्ति मर गया तो शत्रुता भी मर जानी चाहिए, अभी जैसे बड़े भैया का , एक श्रेष्ठ राजा का अग्नि संस्कार किया जाता है उसी प्रकार करो “।

जो शत्रु के प्रति भी द्वेष नहीं रख सकते ऐसे है श्री राम , हमे राम जी यह गुण जरूर सीखना चाहिए।

अच्छे प्रबंधक

श्री राम जी से हमे अच्छे प्रबंधक (management) और एक अच्छे Team Leader के गुण जरूर सीखने चाहिए। कैसे राम जी ने युद्ध के लिए इतनी बड़ी सेना तैयार की , वे चाहते तो अपने पिता राजा दशरथ और भाइयो से कह सकते थे सेना के लिए उन्हें बड़ी से बड़ी सेना मिल जाती। लेकिन उन्होंने खुद ही इतनी बड़ी सेना तैयार की और बुराई पर अच्छी की जीत के मिसाल बने। राम जी अपने राज्य को भी बहुत अच्छे से manage करते थे। इसलिए जब भी कभी अच्छे राज्य का Example देना होता है तो रामराज्य कहा जाता है

How to Improve or Develop Your Personality in Hindi

तो दोस्तों ये थे वो गुण जो हमे भगवान श्री राम से सीखने चाहिए, अगर हम यह गुण अपनाये तो हमारी Personality में चार चाँद लग जायेंगे। आशा करती हूँ आपको हमारी यह पोस्ट भगवान राम से सीखने चाहिए यह गुण – How to Develop Personality in Hindi . अगर आपको अच्छी लगी तो ज्यादा से ज्यादा शेयर करे , धन्यवाद !


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