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Motivational Story in Hindi for Success – भाग्य बड़ा या कर्म

Motivational Story in Hindi

Motivational Story in Hindi for Success – भाग्य बड़ा या कर्म :  नमस्कार दोस्तों मैं सरबजीत कौर आपका स्वागत करती हूँ अपने ब्लॉग www.talkshauk.com में , हमारी आज की पोस्ट है।  Motivational Story in Hindi for Success – भाग्य बड़ा या कर्म, दोस्तों भाग्य बड़ा या कर्म यह सवाल तो बरसो से चला ही आ रहा है।

गीता में भगवान श्री कृष्णा अर्जुन को कर्म करने का उपदेश देते है , भगवान श्री कृष्णा अर्जुन से कहते है – ” राज्य तुम्हारे भाग्य में है या नहीं यह बाद की बात है , पर तुम्हे पहले युद्ध तो लड़ना ही पड़ेगा ” अर्थात कर्म तो करना ही पड़ेगा।

आज मैं आपसे एक कहानी शेयर कर रही हूँ  जिसके भीतर एक गहरी सीख छिपी है। तो चलिये पढ़ते है कहानी Motivational Story in Hindi  for Success – भाग्य बड़ा या कर्म।

Motivational Story in Hindi  for Success – भाग्य बड़ा या कर्म:

 

Motivational Story in Hindi

एक जंगल एक दोनों ओर दो अलग -अलग राजाओ का राज्य था। और उसी जंगल में एक महात्मा रहते थे , दोनों ही राजा उन्हें अपने गुरु की तरह मानते थे। उसी जंगल के बीचो बीच एक नदी बहती थी और उस नदी को ले के अक्सर दोनों राज्यों के बीच लड़ाई झगड़े होते रहते थे।

एक बार तो बात बिगड़ते – बिगड़ते युद्ध तक आ पहुंची , कोई भी राजा सुलह को तैयार नहीं था। युद्ध तो निश्चित ही था , दोनों राजाओ ने महात्मा के पास जा कर आशीर्वाद लेने का निश्चय किया ,

पहला राजा जब महात्मा के पास पहुँचा तो महात्मा ने उससे कहा – ” तुम्हारे भाग्य में जीत नहीं दिखती , आगे ईश्वर की मर्जी ” . यह सुन कर पहले तो राजा विचलित हुआ। फिर उसने सोचा अगर हारना ही है तो पूरी ताकत से लड़ेंगे , जल्दी हार नहीं मानेंगे , फिर हार भी गए तो दुसरो की लिए उदहारण बना देंगे।

दूसरा राजा भी आर्शीवाद लेने महात्मा के पास गया , महात्मा ने कहा – ” भाग्य तो तेरे पक्ष में ही लगता है ” राजा तो यह सुन कर बेहद खुश हो गया। वापिस लौटा तो इतना निश्चिन्त की जैसे उसने युद्ध जीत ही लिया हो।

युद्ध का दिन आया दोनों तरफ से बिगुल बजा , एक तरफ की सेना यह सोच कर लड़ रही थी , चाहे किस्मत में हार हो , पर हम आसानी से हार नहीं मानेंगे।

और दूसरे तरफ की सेना यह सोच कर लड़ रही थी , की जीतना तो हमे ही है तो घबराना कैसा। लड़ते – लड़ते राजा के घोड़े की पैर की नाल भी निकल गयी और घोडा लड़खड़ाने लगा। पर राजा ने ध्यान ही नहीं दिया और यह सोचा की जब जीत भाग्य में है ही तो फिर किस बात की चिंता , पर कुछ ही देर पश्चात घोडा लड़खड़ा कर गिर गया,  तभी राजा दुश्मन के हाथ पड़ गया और उसकी हार हो गयी।

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युद्ध के निर्णय के बाद महात्मा भी वह आ गए। दोनों ही राजाओं को यह जानने की उत्सुकता थी की भाग्य का लिखा बदल कैसे गया। उन्होंने महात्मा से प्रश्न किया।, महात्मा ने मुस्कुरा के उत्तर दिया- ” राजन भाग्य नहीं बदला , वो अपनी जगह बिलकुल सही है लेकिन तुम लोग बदल गए हो ”

महात्मा ने जीतने वाले राजा की ओर इशारा करते हुए कहा – ” अब आप को ही देखो राजन , संभावित हार के बारे में सुन कर , आपने दिन – रात एक कर दिया सब कुछ भूल कर जबरदस्त तैयारी की, खुद हर बात का ख्याल रखा जबकि पहले आपकी योजना सेनापति के बल पर लड़ने की थी ”

फिर महात्मा ने हारने वाले राजा से कहा – ” और आप राजन , आपने तो युद्ध से पहले ही जीत का जश्न मानना आरम्भ कर दिया था , आपने तो अपने घोड़े की नाल तक का ख्याल नहीं रखा  फिर इतनी बड़ी सेना को कैसे संभाल पाते ” . और हुआ वही जो होना लिखा था भाग्य नहीं बदला पर जिनके भाग्य में जो लिखा था उन्होंने ही अपना व्यक्तित्व बदल लिया।  फिर बेचारा भाग्य क्या करता।

दोस्तों भाग्य लोहे ही तरह वही खींच कर जाता है जहाँ कर्म का चुम्बक हो , हम भाग्य के आधीन नहीं है , हम तो स्वयं ही भाग्य के निर्माता है…हमने जो भी कर्म किये , आज वही हमारा भाग्य है।

कुछ परिस्थियों पर हमारा बस नहीं चलता , किसी अमीर या गरीब घर पर पैदा हो जाना यह हमारे बस में नहीं , कोई दुर्घटना ही हो गयी इस पर भी हमारा कोई बस नहीं है।  पर ऐसी परिस्थिति में हमारी प्रतिक्रिया तो हमारे बस में है , हम टूट कर बिखर भी सकते है और कर्मो से सवर भी सकते है.

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मेहनत सीढ़ियों की तरह होती है और भाग्य लिफ्ट की तरह ,जो किसी भी समय बंद हो सकती है , सीढ़ियां हमेशा ऊँचाई की ओर ही ले जाती है। 

दोस्तों ये थी आज की Motivational Story in Hindi for Success – भाग्य बड़ा या कर्म , उम्मीद करती हूँ आपको अच्छी लगी होगी। अगर अच्छी लगी हो तो कृपया शेयर करना ना भूले। और आप किस पर विश्वास करते है ,भाग्य या कर्म comment कर के जरूर बताये।

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Sarabjeet Kaur

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