स्वामी विवेकांनद की प्रेणादायक कहानियाँ| Swami Vivekananda Stories in Hindi

स्वामी विवेकांनद की प्रेणादायक कहानियाँ | Swami Vivekananda Stories in Hindi :

स्वामी विवेकानंद ऐसे महापुरुष थे। जिनके उच्च विचारो , अध्यात्मिक ज्ञान , सांस्कृतिक अनुभवों से हर कोई प्रभावित है। आज हम स्वामी विवेकानंद की प्रेणादायक और सत्य कहानियाँ पढ़ेंगे। और ऐसी कहानियाँ जिससे आपको आज जरूर कोई बड़ी सीख मिलेगी। तो चलिए पढ़ते है स्वामी विवेकानंद की प्रेणादायक कहानियाँ ( Swami Vivekananda Stories in Hindi ).

संकटों से भागो नहीं ,उनका सामना करो –

Swami Vivekananda Stories

यह घटना स्वामी विवेकानंद के परिव्रजाक जीवन की एक घटना है। उन दिनों जब स्वामी विवेकानंद वाराणसी में थे। एक दिन दुर्गामंदिर से लौटते समय बंदरो के एक झुण्ड ने स्वामी विवेकानंद का पीछा किया। स्वामी विवेकानंद भागने लगे , बन्दर भी पीछे दौड़े। तभी एक वृद्ध सन्यासी ने स्वामी विवेकानंद को पुकारकर कहा , ” भागो मत , दुष्टों का सामना करो। “ स्वामी विवेकानंद उनकी आवाज़ सुनकर दुष्टों का सामना करने के लिए मुड़े , और फिर उन बंदरो ने स्वामी विवेकानंद का पीछा छोड़ दिया। इस घटना से स्वामी विवेकानंद को गहरी एवं महत्वपूर्ण शिक्षा मिली। विघ्न – बाधाओं को देख कर कभी भागना नहीं चाहिए। डट कर , साहस के साथ उनका सामना करना चाहिए। परवर्ती जीवन में , न्यूयोर्क में एक भाषण के दौरान स्वामी विवेकानंद ने इस घटना का उल्लेख करते हुए कहा था , ” यह पुरे जीवन के लिए शिक्षा है। भयंकर दुश्मन से भी आँखे मिलाओ , साहस के साथ उसके सम्मुख खड़े हो जाओ। जीवन में दुःख – कष्ट को देखकर जब हम भागते नहीं , तो वो भी बंदरो की तरह हमारे पास फटकने का साहस नहीं कर पाते। “

यदि हमे मुक्ति पानी है , तो प्रकृति पर विजय करके पानी होगी। उससे मुँह मोड़ कर भागने से नहीं। कायर कभी विजय नहीं होते। यदि हम चाहते है कि भय, बाधा , विपत्ति एवं अज्ञानता हमसे दूर रहे तो हमे उनका सामना करना होगा।

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एकाग्रता की शक्ति (Swami Vivekananda Hindi Story)

स्वामी विवेकानंद अमेरिका में एक दिन , एक नदी के किनारे टहल रहे थे। उन्होंने देखा कि कुछ युवक एक पूल पर खड़े होकर तैरते हुए अंडो के छिलको पर गोली से निशाना साधने की चेष्टा कर रहे थे। लेकिन एक बार भी सफल नहीं हो पा रहे थे। खड़े होकर देखते – देखते स्वामी जी के होठों पर मुस्कान उभर आयी।

उन युवकों में से एक ने यह देखा , और स्वामी विवेकानंद से बोला “यह काम जितना सरल दिखता है उतना सरल है नहीं , ज़रा देखे तो आप कैसा निशाना लगाते है।

स्वामी विवेकानंद ने बिना झिझक बन्दुक ली और फिर एक के बाद एक बारह अंडो के छिलको को गोली का निशाना बनाया। सारे युवक आश्चर्यचकित रह गए , उन्होंने सोचा – ये अवश्य ही बहुत दिनों से बन्दुक चलाते होंगे। स्वामी विवेकानंद ने कहा कि पहले उन्होंने कभी बन्दुक नहीं पकड़ी थी। और उनकी सफलता का रहस्य उनकी एकाग्रता है।

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देखा दोस्तों कैसे छोटी – छोटी घटनाओ और कहानियों से हमे कितनी बड़ी सीख मिल जाती है , बस हमारा नज़रिया सकारात्मक होना चाहिए। अगर आपने आज इस पोस्ट Swami Vivekananda Stories से कुछ अच्छा सीखा तो हमे कमेंट के माध्यम से जरूर बताये और अपने दोस्तों के साथ Facebook , Whatsapp , Twitter आदि पर शेयर जरूर करे धन्यवाद। मिलते है फिर कोई नयी पोस्ट के साथ Keep Supporting .

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